Maa Siddhidatri Vrat Katha Puja Vidhi | माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि कथा मंत्र और आरती

Maa Siddhidatri Vrat Katha Puja Vidhi. माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि कथा मंत्र और आरती। नवरात्रि की नौवीं देवी देवी सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करे? इसकी पूरी जानकारी आप सभी को मेरी इस पोस्ट में मिलने वाली है। 

Apr 9, 2024 - 07:35
Apr 9, 2024 - 07:36
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Maa Siddhidatri Vrat Katha Puja Vidhi | माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि कथा मंत्र और आरती
Maa Siddhidatri Vrat Katha Puja Vidhi

Maa Siddhidatri Vrat Katha Puja Vidhi. माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि कथा मंत्र और आरती। नवरात्रि की नौवीं देवी देवी सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करे? इसकी पूरी जानकारी आप सभी को मेरी इस पोस्ट में मिलने वाली है। 

Maa Siddhidatri Vrat Katha Puja Vidhi

Maa Siddhidatri Vrat Katha Puja Vidhi 

हमारे हिन्दू धर्म में हर साल नवरात्री का त्यौहार 2 बार आता है। एक आता है गर्मी शुरू होने पर (चैत्र नवरात्र) और एक आता है सर्दी शुरू होने पर। इन दोनों ही समय नवरात्री के दिन माता के 9 रूपों की पूजा का विधान है। यहाँ मैं आपको विस्तार से एक एक रूप के बारे में जानकारी देने वाला हु। ताकि आप सभी लोग माता के सभी रूपों की पूजा सही तरीके से कर सको। पूजा के बारे में बताने से पहले मैं इस साल नवराति की उस तारीख के बारे में बताने वाला हु। जिसमे आप देवी के अलग अलग रूप की पूजा कर सकते हो। 

माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। ममता मोह से विरक्त होकर महर्षि मेधा के उपदेश से समाधि ने देवी की आराधना कर, ज्ञान प्राप्त कर मुक्ति प्राप्त की थी। सिद्धि अर्थात् मोक्ष को देने वाली होने से उस देवी का नाम "सिद्धिदात्री" पड़ा।    

माँ सिद्धिदात्री का श्लोक :

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ।।

माँ सिद्धिदात्री स्वरुप :

अस्त्र-शस्त्र - गदा, चक्र

वाहन - सिंह

माँ सिद्धिदात्री की चार भुजाएं, वर्ण रक्त, वाहन सिंह है, कमल पुष्प पर आसीन एक हाथ में कमलपुष्प, दूसरे हाथ में चक्र, तीसरे हाथ में गदा और चौथे में शंख है। इनके नेत्रों में करूणा लहरा रही है। देवी प्रसन्न मुद्रा में हैं।

माँ सिद्धिदात्री मंत्र 

ॐ भूर्भुवः स्वः सिद्धदे इहागच्छ इहतिष्ठ। सिद्धिदायै नमः ।

सिद्धिदांमावाहयामि स्थापयामि नमः ।। पाद्यादि पूजनं विधाय ।।

ॐ दुर्गमे दुस्तरे कार्य भयदुर्गविनाशिनीम् ।

पूजयामि सदा भक्त्या दुर्गा दुर्गतिनाशिनीम् ।।

माँ सिद्धिदात्री की आराधना महत्व :

इनकी आराधना से जातक को अणिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, सर्वकामावसायिता, दूर श्रवण, परकामा प्रवेश, वा‌सिद्ध, अमरत्व भावना सिद्धि आदि समस्त सिद्धियों नव निधियों की प्राप्ति होती है। इनकी उपासना से आर्तजनों के असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। अतः इनके चरणों की शरण पाने के लिए हमें सर्वविध प्रयत्न करना चाहिए। देवी की कृपा से विशुद्ध ज्ञान के द्वारा जीव अपने जीव भाव को त्याग कर जीवनमुक्ति प्राप्त करता है।

Maa Siddhidatri Vrat Katha

पुरानी कथा के अनुसार भगवान भोलेनाथ सिद्धिदात्री की उपासना और तपस्या करके आठो सिद्धियां प्राप्त की थी। इसी प्रकार भगवान शिव का आधा शरीर नारी का हो गया था और वह अर्थ्नारिश्वर कहलाए। मां दुर्गा का यह रूप अत्यंत शक्तिशाली है। क्योंकि यह शक्ति सभी देवी देवताओं के तेज से प्रकट हुई है। ऐसा कहा जाता है की महिषासुर का वध भी सिद्धिदात्री ने किया था। महिषासुर ने सभी देवताओं पर अत्याचार किया और जब देवता आत्याचार ज्यादा होने पर अपनी समस्या लेकर भगवान शिव और प्रभु विष्णु के पास गए। तो वहां मौजूद सभी देवतागण और त्रिदेव से एक तेज उत्पन्न हुआ। इस तेज से एक शक्ति उत्पन्न हुई जो सिद्धिदात्री के नाम से जानी जाती है।  

माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि

  • यह नवरात्रि का आखिरी दिन होता है इस दिन मां के वहां हथियारों एनी देवी देवताओं के नाम से पूजा हवन किया जाता है। 
  • इस दिन साधक को जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहने चाहिए और मां का ध्यान कर उन्हें प्रणाम करना चाहिए।  
  • साफ़ चौकी पर मां की मूर्ति की स्थापना करें और उन्हें गंगाजल से स्नान कराए।  
  • मां सिद्धिदात्री को बैंगनी या जामुनी रंग पसंद है, इसलिए इस दिन मां का आसान आसान बेगनी या जामुनी रंग का होना चाहिए।  
  • मां सिद्धिदात्री को हलवा पूरी सब्जी खीर काले चने फल और नारियल का भोग अवश्य लगे।  
  • इसके बाद कन्या पूजन करवाना चाहिए कन्या पूजन के बिना नवरात्रि शुभ फलदाई नहीं होती।  
  • कुछ घर में अष्टमी के दिन कन्या पूजन होता है। वहीं कुछ घरो में नवमी के दिन कन्या पूजन करवाया जाता है। 
  • सभी कन्याओं को अपने सामर्थ्य अनुसार भेट दे कन्या पूजन में एक लंगूर का होना भी अति आवश्यक है, लंगूर यानी लड़का। 
  • ऐसा माना जाता है की देवी की रक्षा और सेवा के लिए भगवान शिव ने एक भैरव को हर शक्ति पीठ पर रखा हुआ है। इसलिए कन्या पूजन में एक बालक का होना अति आवश्यक है। 

आरती देवी सिद्धिदात्री की 

  • जय सिद्धिदात्री माँ तू सिद्धि की दाता।
  • तु भक्तों की रक्षक तू दासों की माता ।।
  • तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।
  • तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि ।।
  • कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।
  • जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।।
  • तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।
  • तू जगदंबे दाती तू सर्व सिद्धि है।।
  • रविवार को तेरा सुमिरन करे जो ।
  • तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो ।।
  • तू सब काज उसके करती है पूरे।
  • कभी काम उसके रहे ना अधूरे ।।
  • तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।
  • रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।।
  • सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली ।
  • जो है तेरे दर का ही अंबे सवाली।।
  • हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।
  • महा नंदा मंदिर में है वास तेरा।।
  • मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।
  • भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता ।।

  1. पहले दिन होती है मां शैलपुत्री की पूजा विधि कथा मंत्र और आरती की जानकारी 
  2. दूसरे दिन होती है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि कथा मंत्र और आरती की जानकारी 
  3. तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा विधि कथा मंत्र और आरती की जानकारी 
  4. चौथे दिन होती है माँ कुष्मांडा की पूजा विधि कथा मंत्र और आरती की जानकारी 
  5. पांचवे दिन होती है माँ स्कंदमाता की पूजा विधि कथा मंत्र और आरती की जानकारी 
  6. छठे दिन होती है मां कात्यायनी की पूजा विधि कथा मंत्र और आरती की जानकारी 
  7. सातवें दिन होती है मां कालरात्रि की पूजा विधि कथा मंत्र और आरती की जानकारी 
  8. आठवें दिन होती है मां मां महागौरी की पूजा विधि कथा मंत्र और आरती की जानकारी 
  9. आखिरी दिन होती है मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि कथा मंत्र और आरती की जानकारी 

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