Pancha Parva Date | दिवाली के पांच पर्व की जानकारी

सबसे पहला त्यौहार धन तेरस होता है। दूसरा त्यौहार नरकचतुर्दशी (रुप चतुर्दशी) अर्थात् छोटी दीपावली मनाया जाएगा। तीसरे दिन दीपावली मनाई जाएंगी। चोथे दिन गोवर्धन पूजा तथा अन्नकूट बनाया जाएगा। पांचवे और लास्ट दिन भाई दूज अर्थात् यम द्वितीया का पर्व मनाया जाएगा।

Jun 09, 2025 - 16:15
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Pancha Parva Date | दिवाली के पांच पर्व की जानकारी
Pancha Parva Date
  • दिवाली के पांच पर्व

    हर साल की तरह इस वर्ष भी इस महापर्व को मनाने का इन्तजार हर हिन्दू कर रहा रहा है। दिवाली के इस पांच पर्व में अलग अलग दिन अलग अलग त्यौहार बनाया जाता है। जिसमे से  सबसे पहला त्यौहार धन तेरस होता है। दूसरा त्यौहार नरकचतुर्दशी (रुप चतुर्दशी) अर्थात् छोटी दीपावली मनाया जाएगा। तीसरे दिन दीपावली मनाई जाएंगी। चोथे दिन गोवर्धन पूजा तथा अन्नकूट बनाया जाएगा। पांचवे और लास्ट दिन भाई दूज अर्थात् यम द्वितीया का पर्व मनाया जाएगा।

    ये वो दीपावली के पांच पर्व है जो हर साल बनाये जाते है. दीपावली के पांच पर्व इस साल किस किस तारीख को मनाये जायेंगे इसकी जानकारी मैंने आपको निचे दे रहा हु।

  • धनत्रयोदशी (धनतेरस) की तारीख और जानकारी

    दिवाली के इस पांच पर्व में से  सबसे पहला त्यौहार धनत्रयोदशी होता है। धनत्रयोदशी को सामान्य रूप  धनतेरस' भी कहते हैं। यह आरोग्य एवं धन प्राप्ति का पर्व दीपावली से दो दिन पूर्व कार्तिक माह की कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है।

    इस पर्व के निम्नांकित दो मुख्य रूप हैं :

    1. धन्वन्तरि जयन्ती
    2. धनतेरस

    समुद्र मन्थन के समय भगवान् धन्वन्तरि का कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को प्राकट्य हुआ था। आयुर्वेद का उपदेश देने के कारण वैद्यगण इस दिन भगवान् धन्वन्तरि की जयन्ती मनाते हुए उनका विधिवत् पूजन करते हैं।

    इस वर्ष यानी 2024 में मंगलवार 29 नवम्बर, 2024 को धन्वन्तरि जयन्ती मनाई जाएगी और उसी दिन प्रातःकाल भगवान् धन्वन्तरि का पूजन किया जाएगा।

    धनतेरस के दिन शुभ मुहूर्त में नए बर्तन, आभूषण अथवा अन्य वस्तुएँ खरीदकर लाने की परम्परा है। इस दिन बर्तन खरीदकर लाने का विशेष महत्त्व होता है। ऐसा माना जाता है कि नए बर्तन के साथ समृद्धि, सुख एवं सौभाग्य का आगमन होता है। इस दिन उन्हीं वस्तुओं का क्रय करें जिनकी आवश्यकता हो, धन के अपव्यय से यथासम्भव बचना भी धनतेरस का विधान है।

  • नरकचतुर्दशी (रुप चतुर्दशी) की तारीख और जानकारी

    दीपावली पर्व का दूसरा दिन नरक चतुर्दशी के रूप में जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान् श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार इस दिन अरुणोदय (सूर्योदय से पूर्व) में
    नरक के भय से बचने के लिए स्नान किया जाता है।

    यह भी मान्यता है कि इस दिन नरक के स्वामी यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है। जिससे व्यक्ति मृत्यु के पश्चात् नरक में जाने और यम यातना सहने से बचता है। इसी कारण इसे नरक चतुर्दशी कहा जाता है।

    इस वर्ष यानी 2024 में 30 नवम्बर 2024 को नरक चतुर्दशी मनायी जाएगी।

    नरक चतुर्दशी पर निम्नलिखित प्रमुख कर्म सम्पन्न किए जाते हैं :

    1. सूर्योदय से पूर्व उबटन से स्नान
    2. प्रातःकाल देवपूजन एवं दीपदान
    3. मध्याह्नकाल में हनूमान् जी का पूजन
    4. सायंकाल यमराज के निमित्त दीपदान
    5. सायंकाल ही पितरों के निमित्त मशाल दर्शन
    6. सायंकाल ही दीपमाला का प्रज्वलन
  • दीपावली की तारीख और जानकारी

    अमावस्या के दिन का समुद्रमन्थन के दौरान क्षीर सागर से महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था और इस दिन देवता सहित सम्पूर्ण सृष्टि ने माँ लक्ष्मी की पूजा- अर्चना की थी। तभी से इस तिथि को कमला जयन्ती एवं महालक्ष्मी पूजन के रूप में जाना जाता है।

    दीपावली पर महालक्ष्मी रात्रि में विचरण करती हैं और यह देखती हैं कि किन-किन घरों में साफ- सफाई एवं दीपमाला प्रज्वलित की गई है। वे उन घरों में आगामी एक वर्ष के लिए निवास करती हैं, जिनमें साफ-सफाई एवं दीपमाला प्रज्वलित की जाती है।

    दीपावली पर भगवान् राम 14 वर्ष का वनवास पूर्ण करने के उपरान्त अयोध्या जब वापस लौटे, तब उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीपमाला प्रज्वलित की थी। तब से दीपावली पर दीपमाला प्रज्वलन की परम्परा आरम्भ हुई और वह आज तक बनी हुई है।

    ऐसी भी मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को प्राग्ज्योतिषपुर में भगवान् श्रीकृष्ण ने आततायी नरकासुर का वध किया और उसके दूसरे दिन जब वे द्वारका लौटे, तब वहाँ के निवासियों ने उनके स्वागत एवं विजयोत्सव के रूप में सम्पूर्ण नगर को सजाया-सँवारा था तथा दीपमालाएँ प्रज्वलित की थीं। तब से दीपावली पर दीपमाला प्रज्वलित की जाती है और उसे उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

  • गोवर्धन पूजा तथा अन्नकूट की तारीख और जानकारी

    पचदिनात्मक दीपावली पर्व के चौथे दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 2 नवम्बर 2024 को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा।

    गोवर्धन पर्व मनाने वालों को इस दिन प्रातःकाल स्नानादि से शुद्ध होने के पश्चात् गोवर्धन पर्वत एवं भगवान् श्रीकृष्ण का पूजन करना चाहिए। इस अवसर घर में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत - बनाया जाता है। ब्रजक्षेत्र में पर्वत के साथ गोवंश की प्रतिमाएँ भी गोबर से बनाकर मोरपंख तथा अन्य सौंदर्य सामग्री से सजाई जाती हैं। इनका सायंकाल सूर्यास्त के पश्चात् दूध, दही, पक्वान्न का भोग लगाने के बाद रोली, पुष्प, धूप, दीप इत्यादि से पूजन किया जाता है।

    गोवर्धन को अन्नकूट का भोग लगाया जाताह है। अन्नकूट में शांक, फल, अन्न, वनस्पतियों, दूध एवं दही से बने पदार्थ, मालपुए आदि मिष्टान्न शामिल हैं। इस पर्व पर दाल, बाटी, चूरमा का भी भोग लगाया जाता है। नेवैद्य अर्पण एवं पूजन के बाद मन्त्रव का उच्चारण करते हुए निर्मित गोवर्धन की सपरिवार सात परिक्रमा की जाती है

  • भाई दूज की तारीख और जानकारी

    गोवर्धन पूजा के अगले दिन 3 नवम्बर 2024 को 'यमद्वितीया' अथवा 'भाईदूज' पर्व मनाया जाएगा। बहिनों द्वारा किए
    जाने वाले इस व्रत से भाई को दीर्घायु एवं बहिन को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसे अपराह्णव्यापिनी ग्रहण करना चाहिए। इस पर्व पर जहाँ यमुना स्नान एवं यम पूजन किया जाता है,

    वहीं बहिन के घर भाई का भोजन होता है और भाई बहिन को कोई भेंट देता है। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी औरम्भ
    से पाँच दिवसीय दीपोत्सव का यह अन्तिम पर्व होता है। इस दिन बहिनें प्रातः स्नानादि से शुद्ध होकर अष्टदल पर
    श्रीगणेशादि का स्थापन करके यम, यमुना, चित्रगुप्त तथा यमदूतों का पूजन कर यमराज से मन्त्र से प्रार्थना करें

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