Sone ki Mohro ki Dimagi Paheli | सोने की मोहरों की पहेली
Sone ki Mohro ki Dimagi Paheli. सोने की मोहरों की पहेली.
थैली में मोहरों की संख्या क्या थी ?
किसी राज दरबार में तीन व्यक्ति ने अपने साहस का प्रदर्शन किया इससे प्रसन्न होकर वहां के राजा ने उन्हें सोने की मोहरों की एक थैली पुरुस्कार के रूप में दी। और कहां की तुम इन मोहरों को सूर्योदय होने पर तीन बराबर भागों में बाट लेना। अगर तीन बराबर भाग ना हो सके तो बची हुई मोहरों को मंदिर में चढ़ा देना।
रात को वह तीनों व्यक्ति एक मंदिर में ठहरे मोहरों की थैली मूर्ति के पास रख दी और सो गए। एक व्यक्ति की नींद एक बजे खुली वह विचार करने लगा। कि सुबह ना मालूम क्या होगा मैं अपने हिस्सा अभी क्यों ना निकाल लूं । ऐसा सोचकर ही वो चुपके से उठा और उसने थैली में से मोहरों को निकाल कर तीन भागों में बांटने का प्रयास किया, तो एक मोहर अभिवादित बच गई। उसने उसे मोहरों को मंदिर की गुल्लक में डाल दिया अपना हिस्सा लिया और शेष मोहरों को थेली में वापस रखकर सो गया।
रात 2 बजे दुसरे व्यक्ति की आंख खुली उसने भी यही सोचा और थैली की मोहरों को तीन भागों में बांटा इस बार भी एक मोह शेष बच गई। जिससे उसने मंदिर के गुल्लक में डाल दिया अपना भाग लिया। शेष मोहरों को थैली में डालकर सो गया।
रात 3 बजे तीसरा व्यक्ति उठा उसने भी यही सोचा। और थैली की मोहरों को तीन बराबर के भागों में बांटा। इस बार भी एक मोर बिना बंटी रह गई उसने उसे मोड को मंदिर के गुल्लक में डाल अपना भाग लिया शेष मोरों को थैली में रखा और चुपचाप सो गया।
सूर्योदय होने पर तीनों व्यक्तियों ने मोहरों की थेली खोली। और मोहरों को तीन भागो में बांटने पर देखा कि एक मोहर बच गई है। उन्होंने उसे मंदिर के गुल्लक में डाल दिया और अपना अपना हिस्सा ले लिया।
सवाल यह है कि प्रारंभ में थैली में कम से कम कितनी मोहरों थी ?
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